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आखिर क्या होता है कोलेस्ट्रॉल? क्यों इसका बढ़ना शरीर के लिए हानिकारक है?

cholesterol in hindi

भागदौड़ भरी ज़िन्दगी और व्यस्तता के चलते हम अपने स्वास्थ्य पर पूरा ध्यान नहीं दे पाते हैं। जिससे हमारा शरीर अक्सर रोग से ग्रसित हो जाता है। इसमें से कुछ रोग ऐसे होते हैं जिसके लक्षण हमें तुरंत नज़र आते हैं लेकिन कुछ रोग ऐसे भी होते हैं जिसके लक्षण हमें एकदम से नज़र नहीं आते। ऐसे रोग अक्सर शरीर में किसी पदार्थ के बढ़ने या घटने से उत्पन्न होते हैं। इन्हीं में से एक है कोलेस्ट्रॉल। Cholesterol के बढ़ने से भी शरीर कई जटिलताओं से गिर जाता है। आज इस आर्टिकल में हम आपको Cholesterol के बढ़ने से होने वाले दुष्प्रभावों, Cholesterol बढ़ने के कारणों , कोलेस्ट्रॉल बढ़ने पर क्या करे ? आदि के बारे में बताएंगे।

कोलेस्ट्रॉल क्या होता है?

Cholesterol को हिंदी में पित्तसांद्रव भी कहते हैं। यह मोम जैसा एक पदार्थ होता है, जो हमारे खून में पाया जाता है। ये यकृत से उत्पन्न होता है। Cholesterol पशुओं और मनुष्यों के कोशिका झिल्ली समेत शरीर के हर एक भाग में पाया जाता है। साथ ही Cholesterol कोशिका झिल्ली का एक महत्वपूर्ण भाग होता है। Cholesterol हमारे शरीर में विटामिन डी, हार्मोन्स और पित्त का निर्माण करता है। जो हमारे शरीर में पाए जाने वाले वसा को पचाने में मदद करता है। शरीर में Cholesterol का लगभग 25 प्रतिशत उत्पादन यकृत के माध्यम से होता है। हमारे शरीर को Cholesterol की आवश्यकता मुख्य रूप से कोशिकाओं, हारमोन और बाइल जूस के निर्माण के लिए पड़ती है। जो कि वसा के पाचन में मदद करते हैं।

कोलेस्टॉल कितने प्रकार का होता है ?

Cholesterol तीन प्रकार का होता है।

1 – एल डी एल कोलेस्ट्रॉल
2 – एच डी एल कोलेस्ट्रॉल
3 – वी एल डी एल कोलेस्ट्रॉल

अब हम इन तीनों प्रकार के कोलेस्ट्रॉल के बारे में विस्तार से जानेंगे।

1 – एल डी एल कोलेस्ट्रॉल क्या होता है ? (लो डेनसिटी लिपोप्रोटीन्स)

न्यून घनत्व वाला लिपोप्रोटीन कोलेस्ट्रॉल एल डी एल Cholesterol कहलाता है। इसे सबसे ज्यादा नुकसानदायक माना जाता है। इस Cholesterol का उत्पादन लिवर से होता है। जो वसा को लिवर से शरीर के अन्य भागों तक पहुंचाता है। ऐसे में यह बहुत जरुरी है कि एल डी एल कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम रहे। अगर रक्त के प्रवाह में Cholesterol की मात्रा आवश्यकता से अधिक हो जाए तो यह रक्तनली की दीवारों पर जमना शुरू हो जाता है। ऐसे में कभी-कभी रक्तनली के छिद्र बंद तक हो जाते हैं। जिससे हार्टअटैक की संभावना बढ़ जाती है।

2 – एच डी एल कोलेस्ट्रॉल क्या होता है ? (हाई डेनसिटी लिपोप्रोटीन्स कोलेस्ट्रॉल)

एच डी एल कोलेस्ट्रॉल को गुड Cholesterol भी कहा जाता है। क्योंकि यह शरीर के लिए अच्छा होता है। यह उच्च घनत्व लिपोप्रोटीन कोलेस्ट्रॉल होता है। एच डी एल कोलेस्ट्रॉल का उत्पादन भी यकृत ही से होता है। इस Cholesterol का काम कोलेस्ट्रॉल और पित्त को ऊतकों और इंद्रियों से पुनष्चक्रित करने के बाद वापस लिवर में पहुँचाना होता है। एच डी एल Cholesterol की मात्रा अधिक होने से हृदय के स्वस्थ होने का पता चलता है। ऐसे में एच डी एल Cholesterol को अच्छा Cholesterol माना जाता है।

3 – वी एल डी एल कोलेस्ट्रॉल (वेरी लो डेनसिटी लिपोप्रोटीन्स कोलेस्ट्रॉल)

यह अति न्यून घनत्व लिपोप्रोटीन कोलेस्ट्रॉल होता है। जो शरीर में लिवर से ऊतकों और इंद्रियों के बीच Cholesterol को ले जाने का काम करता है। वी एल डी एल Cholesterol , एल डी एल Cholesterol से ज्यादा हानिकारक माना जाता है। क्योंकि यह हृदय रोगों का कारण बनता है।

कोलेस्ट्रॉल क्यों बढ़ता है ?

शरीर में 20 प्रतिशत Cholesterol सीधे डाइट से आता है। जबकि 80 प्रतिशत कोलेस्ट्रॉल लीवर बनाता है।

कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के कारण निम्नलिखित हैं।

  • अधिक मात्रा में वसा युक्त भोजन का करना।
  • शरीर का वजन ज्यादा बढ़ जाना।
  • खानपान में लापरवाही बरतना।
  • नियमित व्यायाम का अभाव होना।
  • आनुवांशिक कारण।
  • बढ़ती उम्र भी Cholesterol के बढ़ने का एक कारण है।

कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के लक्षण क्या है ?

Cholesterol बढ़ने के निम्नलिखित लक्षण हैं, जिन्हें आप स्वयं अनुभव कर सकते हैं।

  • पैदल चलने पर सांस फूलने लगना।
  • उच्च रक्तचाप यानी बीपी का हाई रहना।
  • मधुमेह या शुगर रोगी होना।
  • खून का गाढ़ा हो जाना।
  • पैरों में दर्द रहना।
  • मितली आना।
  • जबड़ों और बाहों में दर्द होना।
  • बहुत अधिक पसीना आना आदि।

अगर आप इस तरह के लक्षणों का अनुभव करते हैं तो आपका Cholesterol बढ़ा हुआ हो सकता है। ऐसे में आपको चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।

शरीर में कोलेस्ट्रॉल का पता कैसे चलता है?

हमारे शरीर में Cholesterol का पता लगाने के लिए ब्लड टेस्ट किया जाता है। ब्लड टेस्ट से खून में एचडीएल, एलडीएल Cholesterol की मात्रा का पता लगाया जाता है। ऐसे में यदि कोलेस्ट्रॉल लेवल बढ़ा हुआ होता है तो दवाओं के जरिए इसे कम किया जा सकता है। साथ ही, मेटाबॉलिक सिंड्रोम और ब्लड शुगर लेवल की भी जांच की जाती है।

कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित कैसे करे ?

Cholesterol को कम करने के लिए घरेलू नुस्खे अपनाएं जाते हैं। अगर आपका सवाल है कि Cholesterol को कम करने के लिए क्या खाए ? तो ऐसे में व्यक्ति को Cholesterol कम करने के लिए स्ट्रॉबेरी, सेब, खट्टे फल जैसे संतरा , अंगूर आदि का सेवन करना चाहिए है। साथ ही संतुलित आहार लेना चाहिए। जिससे लीवर पर खराब प्रभाव नहीं पड़े और Cholesterol कंट्रोल में रहे। इसके अलावा नियमित व्यायाम और योग को दैनिक जीवन शैली में अपनाना चाहिए। व्यक्ति को सुबह और शाम टहलने जाना चाहिए। इससे Cholesterol को कंट्रोल करने में मदद मिलती है। साथ ही चिकित्सकीय परामर्श भी अवश्य लेना चाहिए।

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